केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों को विपक्ष ने बताया किसान विरोधी, सड़क पर विरोध करने की दी चेतावनी

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केंद्र सरकार द्वारा लाए कृषि विधेयकों को लेकर उत्तर प्रदेश में भले ही पंजाब और हरियाणा जैसे हालात नहीं बने हों परंतु विरोधी दलों ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश के नेताओं का आरोप है कि किसानों की आय को दोगुना करने का वादा करने वाले काले कानून के जरिए किसानों को उनकी जमीनों से वंचित करने की साजिश रच रहे हैं। कुछ किसान संगठनों ने भी विधेयकों को किसान विरोधी करार देते हुए सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने ट्वीट करके किसानों की मंशा जानने की पैरोकारी की। उन्होंने लिखा कि संसद में किसानों से जुड़े दो बिल, उनकी सभी शंकाओं को दूर किए बिना ही गुरुवार को पास करा दिए गए है। उससे बीएसपी कतई भी सहमत नहीं है। पूरे देश का किसान क्या चाहता है, इस ओर भी केंद्र सरकार जरूर ध्यान दे तो यह बेहतर होगा।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खेती को अमीरों के हाथों गिरवी रखने की बात कही। उन्होंने ट्वीट किया कि भाजपा सरकार खेती को अमीरों के हाथों गिरवी रखने के लिए शोषणकारी विधेयक लाई है। ये खेतों की मेड़ तोड़ने का षड़यंत्र है और साथ ही एमएसपी सुनिश्चित करने वाली मंडियों के धीरे-धीरे खात्मे का भी। भविष्य में किसानों की उपज का उचित दाम भी छिन जाएगा और वो अपनी ही जमीन पर मजदूर बन जाएंगे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने आरोप लगाया कि किसानों की आय को दोगुना करने का वादा करने वाले काले कानून के जरिए किसानों को उनकी जमीनों से वंचित करने की साजिश रच रहे हैं। ये जमींदारी का नया रूप है और पूंजीपतियों को जमीनों को मालिक बनाने का षड़यंत्र। राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी कहा कि बे-सिर पैर की बातें हो रही है। उन्होंने ट्वीट किया, बड़े रिफार्म की बात कर रहे हैं.. कृषि व्यापार को सरकार मुक्त करने की बात कर रही है? तो फिर प्याज के निर्यात पे प्रतिबंध क्यों लगाए है?

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने विधेयकों को किसानों के लिए घातक बताया है। उन्होंने कहा कि भाकियू इसका डटकर विरोध करेगी। भारतीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह ने भी विधेयकों को किसानों से धोखा बताते हुए आक्रोश जताया है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के अध्यक्ष शिवपाल यादव ने आरोप लगाया कि किसानों को विश्वास में लिए बिना बड़े बदलाव वाले विधेयकों को लाना किसी बड़ी साजिश जैसा दिखता है।