एनजीओ के वीजा आवेदनों की कड़ाई से होगी जांच, भारत ने चीन को दिया एक और बड़ा झटका

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चीन के साथ एलएसी पर तनातनी के बीच ऐप बैन के बाद भारत ने उसे एक और बड़ा झटका दिया है। भारत ने चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चाइनीज एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग (सीएआईएफयू) से जुड़े लोगों के वीजा आवेदनों की कड़ाई से जांच पड़ताल का निर्देश दिया है। भारत की मानें तो ये संगठन देश के लिए खतरा हो सकता है जिस कारण एहतियात के तौर पर ये फैसला लिया गया है।

मामले से जुड़े अफसरों की मानें तो भारत सरकार चीन के जिस एनजीओ से जुड़े लोगों के वीजा आवेदनों पर सख्ती करने जा रही है उसका सीधा संबंध कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल कमेटी के यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट से है। ये संगठन चीन से बाहर नेताओं, थिंक टैंक सदस्यों और मीडिया को प्रभावित करने का काम करते हैं। मामले को करीब से देख रहे दो अधिकारियों की मानें तो भारत सरकार ने इंटरनल मेमो के जरिए ये बताया है कि ये एनजीओ देश केलिए चिंता का विषय है। सरकार का कयास है कि इसकी गतिविधियां देश के राष्ट्र हितों के खिलाफ हो सकती हैं।

मामले से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि भारत सरकार के इस फैसले के बाद वीजा लेने के लिए संगठन के प्रतिनिधियों, समूहों से जुड़े लोगों को वीजा लेने के लिए कठिन जांच पड़ताल से गुजरना होगा, भले ही वो थिंक टैंकर्स, व्यापारी ही क्यों न हो। अब वीजा जारी करने से पहले उनकी सघन जांच की जाएगी जिससे भविष्य में देश को किसी तरह का खतरा न हो।

भारत सरकार से चीन को झटके पर झटके  मिलने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि  एनजीओ के प्रमुख नेशनल पीपुलस कांग्रेस के उपाध्यक्ष जी बिंगक्सुआन हैं। गैर लाभकारी एनजीओ सभी देशों के सामाजिक संगठनों के संपर्क में रहता है। एनजीओ का उद्देश्य चीन के लोगों से भारत सहित दुनिया के अन्य देशों के बीच दोस्ती और मजबूत रिश्ते को बढ़ावा देना है